अमरकंटक : महिलाओं ने रखा संतान की लंबी आयु हेतु व्रत , हरछठ की पूजा आराधना ।

संवाददाता – श्रवण उपाध्याय

अमरकंटक – मां नर्मदा जी की उद्गम स्थली / पवित्र नगरी अमरकंटक में आज गुरुवार दिनांक 14 अगस्त 2025 भाद्रपद कृष्ण षष्ठी कृष्ण जन्माष्टमी के दो दिवस पूर्व मनाए जाने वाला हलषष्ठी बलदाऊ जयंती के पावन अवसर पर महिलाओं ने उपवास रख संतान की लंबी आयु और परिवार की सुख संबद्धि के लिए कृष्ण भगवान के बड़े भ्राता बलराम और माता छठी की पूजा आराधना करती है । इस दिन बड़े भैया बलराम का जन्म हुआ था जिसे बलदाऊ छठ भी कहते है । उत्तर भारत में इस त्यौहार को ललही छठ भी कहा जाता है लेकिन गुजरात में इसे राधण छठ कहते है । मान्यता है कि हलषठ की पूजन अर्चन करने से खूब बलदाऊ का आशीर्वाद प्राप्त होता है । नगर में अनेक जगह पूजन करा रहे अमरकंटक निवासी पंडित आकाश द्विवेदी और पंडित राजेश पाठक ने बताया कि यह व्रत पीढ़ी दर पीढ़ी चली आ रही है और यह एक पारंपरिक मान्यता है । महिलाएं अपने परिवारिक जीवन , लाडले की बुरी नजरों और दुर्भाग्य से बचाने एवं दीघायु की कामना हेतु उपवास रहकर पूजन आराधना करती है ।

हरछठ व्रत संतान के सुख , परिवार में आनंद और बच्चों की लंबी आयु हेतु श्रद्धा और भाव से किया जाता हैं पूजन ।

पूजन की परंपरा और सामग्री

व्रत रखने वाली महिलाएं पूजन स्थल , घर के आंगन बीच को साफ-सुथरा करके भैंस के गोबर से लिपाई कर विशेष पौधों जैसे कांस और छूला के डाली तथा बेर की टहनी को लाकर स्थापित करती हैं साथ ही भैंस का दूध , दही , घी , महुआ का पका प्रसाद , पसही का चावल आदि का भोग अर्पित किया जाता है । मिट्टी का पात्र (चुकरिया) , बांस से बना टुकनी,महुआ के पत्तल , दोना, सात प्रकार के अनाज , माता का श्रृंगार आदि सब पूजन में अर्पित किया जाता है । पूजा के बाद व्रती महिलाएं महुआ , दही , पसही का चावल , भाजी आदि प्रसाद रूप में ग्रहण करती हैं ।

पूजन का महत्व –

ब्राह्मणों द्वारा मंत्रोच्चार और आराधना के साथ बलराम जी का स्मरण किया जाता है और सृष्टि माता की वंदना की जाती है । पूजन बाद महिलाएं आशीर्वाद मांगती हैं कि
बच्चों के जीवन में कोई संकट न आए , परिवार में सदा सुख, शांति और मंगल बना रहे । यह व्रत न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है बल्कि परिवार और संतान के प्रति प्रेम , संरक्षण और मंगलकामना का भी उत्सव है । पूजन उपरांत आस पास के घरों में प्रसाद का वितरण भी किया जाता है । यह पूजन नगर के अनेक जगहों पर करते देखा गया ।

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