सभी भारतवासी हिंदू, समान पूर्वजों के वंशज तथा डीएनए अनुक्रम में समानता- केन्द्रीय जनजातीय विवि से पीएचडी में प्रमाणित हुआ

अनूपपुर। ‘हिंदू’ एक भू-सांस्कृतिक अवधारणा है तथा हिंदुत्व, हिंदू और हिंदू राष्ट्र मिलकर भारत की पहचान बनाते हैं, भारत में रहने वाला हर व्यक्ति हिंदू है तथा ‘हिंदू’ शब्द कोई संज्ञा नहीं बल्कि एक विशेषण है, जो गुण और स्वभाव को दर्शाता है। मत-पंथ अलग हैं, लेकिन सांस्कृतिक आधार एक ही है। सभी भारतीयों के डीएनए में एक विशेष समानता है, जिससे हम सभी एक मूल भूखंड के निवासी दिखते है, पीएचडी के मूल तथ्यों में पहला, कि “हिंदू” एक सभ्यतागत पहचान है, धार्मिक नहीं; दूसरा, कि सभी भारतीय हजरों वर्षों में फैले साझे डीएनए और पूर्वज साझा करते हैं; तीसरा, कि भारत पहले से ही जातिविहीन समावेशी समाज की अवधारणा की पुष्टि करता है, चौथा, कि अलग-अलग पूजा पद्धतियां वाले भारतवासियों के पूर्वज की दस्तावेज समान सांस्कृतिक छतरी को प्रकट करते है; और पांचवां, कि भारत में कोई गैर-हिंदू नहीं केवल हिंदू आत्म-जागरूकता की विभिन्न डिग्री उपलब्ध हैं जो हर कोई भारतीय संस्कृति का पालन करता है। सबकी अपनी-अपनी पूजा-पद्धती बन है, मान्यताएं हैं. सबकी अपनी-अपनी भाषा है और विविधता में एकता वाले ये सभी लोग हिंदु ही है इसका पीएचडी रिसर्च में वैज्ञानिक प्रमाणन करके डॉक्टर ऑफ फिलॉसफी की उपाधि प्रदान डॉ. चिन्मय पांडे को की गई है। डॉ. चिन्मय पांडे के शोध निदेशक आचार्य (डॉ) विकास सिंह, स्वदेशी शोध संस्थान के राष्ट्रीय सचिव है।
*पूर्वजों को जानने का अधिकार अधिनियम बनना विकसित भारत 2047 के लिए आधारभूत अनिवार्यता- डॉ. चिन्मय पांडे*
शोध विद्वान डॉ. चिन्मय पांडे ने बताया की भारत में रहने वाले 140 करोड़ भारतीयों के साथ-साथ अखंड भारत के लोग हिंदू ही है तथा उनके पूर्वजों की वंशावली में हिंदू होने की दस्तावेजी प्रमाणन है, तथा डीएनए में एक समानता होने के कारण डीएनए भारत मूल के सभी लोग एक समान देखते हैं, समान पूर्वजों के वंशज होने की प्रमाणिकता के दस्तावेज गया, प्रयागराज, कोणार्क, हरिद्वार सहित जहां-जहां भारत के विभिन्न स्थानों पर पूर्वजों के पिंडदान की प्रक्रिया से जुड़े स्थानों पर वंशावली के दस्तावेज सुरक्षित है, ऐसे समस्त वंशावली लेखक को एवं पंडों के पास दस्तावेजी प्रमाण उपलब्ध है जिसका डिजिटलीकरण आवश्यक है और इसमें समाज, युवा, जनसंख्यागणना के 80 वर्ष के अभिलेख, गांव के प्रमुख वरिष्ठजन एवं पिंडदान के लिए भारत के 50 से अधिक धार्मिक स्थान पर उपलब्ध दस्तावेज और समाज के जुड़ाव से पिछले 25 से 40 पीढ़ी तक की जानकारी प्रत्येक परिवार को जानना चाहिए, पूर्वजों को जानने का अधिकार अधिनियम बनने से लोग उत्सुकतावस और अपने कुटुंबजनों को जानने के लिए इसमें सम्मिलित होंगे और इससे सभी प्रकार की पूजा पद्धति वाले यह जान सकेंगे कि उनके पूर्वज हिंदू ही थे और आक्रांताओं के कालखंड में उनकी पूजा पद्धति बदल गई थी और आक्रांताओं के कालखंड में किस-किस प्रकार के अत्याचार उनके पूर्वजों पर हुए थे, इसे जानने का अधिकार उन्हें भी है, इसलिए पूर्वजों को जानने का अधिकार अधिनियम कानून का बनना बेहद आवश्यक है और यह कानून जातिविहीन समाज की संरचना के लिए और एकात्मक मानववाद की जड़ को मजबूत करने के लिए इस कानून का संसद से पास होना बेहद आवश्यक है और इस प्रकार का पॉलिसी रिकमेंडेशन पीएचडी शोध में डॉक्टर चिन्मय पांडे ने किया है। टोटल फर्टिलिटी रेट और डेमोग्राफी संतुलन में टोटल फर्टिलिटी रेट हेतु आवश्यक पॉलिसी बनाने के लिए भी रिकमेंडेशन किया गया है।
*पीएचडी में पूर्वजों को जानने का अधिकार अधिनियम कानून का ड्राफ्ट भी पारित हुआ*
पीएचडी के दौरान शोध विद्वान द्वारा बनाए गए पूर्वजों को जानने का अधिकार अधिनियम बिल के ड्राफ्ट को एक्सटर्नल एक्सपर्ट द्वारा अनुशंसा प्रदान की गई, ज्ञात हो की इसप्रकार की प्राइवेट बिल को संसद में रखने के लिए भारत के अनेक सांसद लोकसभा और राज्यसभा में इसे रखने के लिए अपनी सहमति भी दे चुके हैं, इस प्रकार के कानून से भारत में सामाजिक समरसता और कुटुंब प्रबोधन के लिए एक अद्वितीय और असाधारण कार्य योजना आगे बढ़ सकेगी। भारत की एकता और अखंडता के लिए यह कानून का लागू किया जाना बेहद आवश्यक माना गया है। शोध विद्वान डॉक्टर चिन्मय पांडे ने बताया कि पूर्वजों को जानने का अधिकार अधिनियम बिल का ड्राफ्ट भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह, शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान, संसदीय कार्य मंत्री को शीघ्र सौपा जाएगा, ताकि यह बिल कानून का स्वरूप ले सके, इस हेतु स्वदेशी जागरण मंच के अखिल भारतीय संगठक कश्मीरी लाल तथा सहसंगठक सतीश कुमार को भी बिल का ड्राफ्ट सौपा जाएगा।
डॉ. चिन्मय पांडे ने शोध निदेशक प्रो विकास सिंह अधिष्ठाता तकनीकी विज्ञान संकाय, गुरु माता श्रीमती प्रियंका सिंह, गुरुबहन क्षितिजा सिंह, गुरुभाई प्रियव्रत सिंह को भी समय-समय पर सतत सहयोग के लिए हृदय से आभार व्यक्त किया है।
डॉ. चिन्मय पांडे ने शोध में वैचारिक सहयोग हेतु अवधूत सिद्ध महायोगी श्रीदादा गुरू, मृत्युंजय आश्रम अमरकंटक के हरिहरानंद , अनंत विभूषित जगद्गुरु रामानंदाचार्य राजेश्वर माऊली सरकार, वंदे महाराज, मुख्य पुजारी, नर्मदा मंदिर शक्तिपीठ सहित गया-हरिद्वार-प्रयागराज के पंडा, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत, सह सरकार्यवाह अरुण कुमार, अभा सह-संपर्क प्रमुख प्रदीप जोशी, अभा पर्यावरण प्रमुख राकेश जैन, अभा संयोजक, प्रज्ञा प्रवाह जे. नंदकुमार, अभा वंशावली संरक्षण प्रमुख रामप्रसाद, अभा सह-बौद्धिक प्रमुख दीपक विस्पुते, राष्ट्रीय सह-महामंत्री भाजपा वी. सतीश, क्षेत्र प्रचारक, मध्य क्षेत्र स्वप्निल कुलकर्णी, अभा संगठक कश्मीरी लाल, अभा सह-संगठक सतीश कुमार, प्रवीण गुप्ता, प्रांत प्रचारक ब्रजकांत, विनोद कुमार, क्षेत्रीय संगठक केशव दुबोलिया, वनवासी कल्याण आश्रम क्षेत्रीय संगठन मंत्री सुभाष बडोले, अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद प्रान्त संगठन मंत्री मनीष राय, मोरध्वज पैकरा, मानस जी, राकेश मौर्य, सौम्य मिश्रा, शिवम् मिश्रा सहित लोकसभा एवं राज्यसभा के अनेक सांसदों को आभार व्यक्त किया है।

डॉ. चिन्मय पांडे ने परिवारजनों श्रीमती माता अपर्णा पाण्डेय , पिता विजय पाण्डेय , पथ प्रदर्शक मामा चैतन्य मिश्र,मामी संध्या मिश्रा, मामा अजीत मिश्रा , सुजीत मिश्रा मौसी अजीता मिश्रा ,अर्चना तिवारी, प्रशस्ति त्रिपाठी , अनुजा, अंशिका ज्योतिषाचार्य भरत राम पाण्डेय, मित्रगण रोहित श्रीवास, शशांक द्विवेदी, अनिरुद्ध सिंह, संदीप हिंडोरे, दुर्गेश पटेल, अमित सिंह, रवि मिश्रा, कृष्णा दुबे, ऋतुराज शोंधिया, बैद्यनाथ राम सहित पूर्वजों को स्मरण स्व. दादाजी चन्द्रकांत पाण्डेय ,दादीजी स्व. विमला देवी पाण्डेय ,नानाजी स्व. प्रभाकर मिश्रा , नानीजी स्व. श्यामा देवी , स्व. श्रीमती राम झारी देवी (गुरु-दादीजी) को भी आभार व्यक्त किया है।
*पीएचडी उपाधि के बने साक्षी* चिनमय पाण्डेय के पीएचडी उपाधि प्राप्ति के ऐतिहासिक एवं गौरवपूर्ण अवसर पर राष्ट्रीय श्रमजीवी पत्रकार परिषद के प्रदेश उपाध्यक्ष एवं शहडोल संभाग प्रभारी राजेश शुक्ला, दैनिक मध्यप्रदेश जनसंदेश के जिला ब्यूरो डॉ. संतोष झा, संकल्प महाविद्यालय के संचालक अंकित शुक्ला तथा दैनिक सी टाइम्स के जिला रिपोर्टर विजय राठौर विशेष रूप से उपस्थित रहे। सभी गणमान्यजनों ने चिनमय पाण्डेय को इस महत्वपूर्ण शैक्षणिक उपलब्धि पर बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की तथा इसे क्षेत्र के लिए गर्व का विषय बताया।

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