बरगवां नगर परिषद पर गंभीर सवाल, कंपनी के निजी मार्ग पर खर्च हुए जनधन को लेकर उठी जांच की मांग
अविनाश शर्मा
अनूपपुर=। जिले के बरगवां नगर परिषद एक बार फिर गंभीर सवालों के घेरे में दिखाई दे रही है। इस बार मामला लगभग 50 लाख रुपये की लागत से निर्मित सड़क को लेकर सामने आया है, जो निर्माण के महज चार माह के भीतर ही बदहाल स्थिति में पहुंचने की चर्चा में है। अब क्षेत्र में यह सवाल तेजी से उठ रहे हैं कि आखिर इतनी बड़ी राशि खर्च होने के बाद सड़क इतनी जल्दी खराब कैसे हो गई? वहीं यह भी चर्चा है कि सड़क की खराब गुणवत्ता को छिपाने के लिए जल्दबाजी में डामरीकरण की तैयारी की जा रही है।
जानकारी के अनुसार वार्ड क्रमांक-3 में ओरिएंट पेपर मिल एवं सोडा फैक्ट्री की ओर जाने वाले मार्ग पर उक्त सड़क का निर्माण कराया गया था। स्थानीय लोगों के बीच यह सवाल उठ रहे हैं कि जिस मार्ग का उपयोग लंबे समय से औद्योगिक गतिविधियों और कंपनी के वाहनों के लिए होता रहा है, उस पर नगर परिषद द्वारा इतनी बड़ी राशि खर्च किए जाने का औचित्य क्या था।

जनता पूछ रही — क्या अन्य वार्डों की जरूरतें कम थीं?
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि यही राशि नगर परिषद के अन्य वार्डों की सड़कों और मूलभूत सुविधाओं पर खर्च होती तो बड़ी संख्या में आम नागरिकों को सीधा लाभ मिलता। क्षेत्र में यह भी चर्चा है कि परिषद ने इस मार्ग को महत्वपूर्ण सार्वजनिक मार्ग बताकर प्राथमिकता दी, जबकि कई लोग इसे कंपनी से जुड़ा मार्ग बता रहे हैं।
चार माह में उखड़ गई सड़क, गुणवत्ता पर उठे सवाल
सड़क निर्माण के कुछ ही महीनों में उसकी हालत खराब होने की खबरों ने निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं। लोगों का कहना है कि यदि लाखों रुपये खर्च होने के बावजूद सड़क टिकाऊ नहीं रही तो निर्माण कार्य की तकनीकी गुणवत्ता और निगरानी व्यवस्था की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
रुका भुगतान और अब डामरीकरण की चर्चा
सूत्रों के अनुसार निर्माण कार्य से जुड़ा भुगतान पिछले कुछ समय से लंबित बताया जा रहा है। वहीं क्षेत्र में चर्चा है कि सड़क पर पुनः डामरीकरण कर उसे ठीक दिखाने की तैयारी चल रही है। यदि ऐसा होता है तो सवाल यह भी उठेगा कि क्या मूल निर्माण कार्य की गुणवत्ता जांचे बिना नई परत चढ़ाकर मामले को समाप्त करने का प्रयास किया जा रहा है?
हितों के टकराव की भी उठ रही मांग
क्षेत्र में कुछ लोगों द्वारा यह मांग भी की जा रही है कि इस पूरे मामले में यह भी जांच की जाए कि कहीं किसी प्रकार के निजी हित या व्यावसायिक संबंधों का प्रभाव तो नहीं पड़ा। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि होना अभी बाकी है।
निष्पक्ष जांच की मांग तेज
स्थानीय नागरिकों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि पूरे मामले की तकनीकी और वित्तीय जांच कराई जाए। साथ ही निर्माण की गुणवत्ता, मार्ग की वास्तविक स्थिति, भुगतान प्रक्रिया तथा स्वीकृति संबंधी दस्तावेजों की भी जांच की जाए ताकि यदि किसी स्तर पर अनियमितता हुई हो तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है — क्या करोड़ों की योजनाओं की तरह यह मामला भी फाइलों में दब जाएगा, या फिर जिम्मेदारों से जवाबदेही तय होगी?