**दिल्ली विधानसभा चुनावः हजारो बेघर मतदाता पर सुध लेने वाला कोई नहीं** क्राईम रिपोर्टर भवेश पिपलिया की खास रिपोर्ट, दिल्ली विधानसभा चुनाव में इस बार भी बेघर लोग मतदान करेंगे। हालांकि, ये बात अलग है कि इनकी कोई सुनने वाला नहीं है। अब तक किसी ने उनकी सुध नहीं ली है। जबकि इनके भी अपने मुद्दे हैं और परेशानियां भी, पर किसी के पेट में पानी तक नहीं हिलता। बेघर अपनी बात कहे तो किससे कहे? अपनी दिल की व्यथा किसको सुनाये? अपनी मांगे किसके सामने जाकर बताये?? जब कोई सुनने वाला हो तब ना !!! कंबल से बदबू आना,टॉयलेट में कई बार पानी की समस्या,पिने के पानी की समस्या, नाहने के लिए बाथरूम ना होना,ऐसी अनेक समस्या है पर समाधान कुछ नहीं मिलता। ऐसी फ़रियाद कई बार मीडिया में उठती रही है पर जमीनी स्तर पर समाधान कुछ नहीं मिलता। हमने दिल्ली के बेघर मतदाता से जानने की कोशिश की वो विधानसभा चुनाव 2020 में आनेवाली सरकार से क्या चाहते है? उनकी मांगे क्या है सरकार से ? शेल्टर में क्या सुधार चाहते है ? यमुना पुस्ता शेल्टर होम में रहने वाले मनोज शर्मा(40) से बात की, उसने कहा हमे दरी, कम्बल, गद्दे सबकुछ मिल रहा है, नाहने के लिए बाथरूम की सुविधा होनी चाहिए और टीवी होने के बावजूद कई महीनो से बांध हालत में पड़ी है ! कोई रिचार्ज नहीं करवा रहा, टीवी शरू होनी चाहिए। मिलन चक्रवती (55) यमुना पुस्ता शेल्टर होम, उनका कहना है सरकार द्वारा स्वाथ्य सुविधा देनी चाहिए, बेघर लोगो को सूजबुज मुजब रोजगार दिलवाना चाहिए। सुरक्षा के लिए CCTV कैमरे लगाने चाहिए।यहाँ पे हजार से भी ज्यादा बेघर है पर नाहने का बाथरूम नहीं है।लोग खुले में मजबूरन नाहते है,सरकार को शेल्टर में छोटा पुस्तकालय बनाना चाहिए ताकि लोग पुस्तक पढ़ सके। अजय कुमार (65) दांडी पार्क रैन बसेरा, बुजुर्ग का कहना है अब हमसे काम नहीं हो पता तो सरकार को हम जैसे लोगो को पेंशन बनवा देनी चाहिए और स्वस्थ के लिए हॉस्पिटल में बेघर को सुविधा मुहैया करानी चाहिए। हम पढ़ेलिखे नहीं है तो हमे इधर उधर भागना पड़ता है। मेरी दोनों आखो में कमजोरी है। इसके लिए हॉस्पिटल में धक्के खा खा के में परेशान हो चूका हूँ। किराये के पैसे नहीं होते, भीख मांगकर अपना गुजरा कर रहा हूँ, वो पैसा मुझे खाने की जगह हॉस्पिटल जाने के किराये में लगाने पड़ते है। रैन बसेरा गोयला डेरी, द्वारका, दीपक का कहना है की में रैन बसेरे में 50 रुपये रोज के हिसाब से सफाई का काम करता हूँ, जिसमे मुझे एक टाइम खाने का भी नहीं हो पता। तो सरकार को इस बारे में सोचना चाहिए और बेघर को रोजगार देने के लिए कुछ करना चाहिए, भीकम सिंह (58), तिलक नगर रैन बसरा ,आने वाली सरकार मुझे और मुज जैसे बेघर को रोजगार दे, ताकि किसी को अपने जीवन निर्वाह करने में परेशानी ना हो, गरीबी एक ऐसा सबक है आदमी मजबूर रहता है,सरकार को गरीबी के बारे में सोचना चाहिए। मजदुर लोग कैसे कमाए, कैसे घर चलाये, कैसे बच्चे को पाले और अपने जीवन को आगे कैसे बढ़ाये। सरकार को आर्थिक सहयोग भी देना चाहिए। इसके अलावा भी हमने सराई काले खां,AIIMS, लालकिला,नेहरू पैलेस के बेघरों से बात की। ज्यादातर रोजगार और स्वाथ्य सुविधा के बारे में बेघरों ने सरकार ने अपेक्षा की है। हमने साथ साथ ये भी जानने की कोशिश की, सरकार से आपको बेघर के तोर पर शेल्टर में क्या सुविधा मिलती है?? तो सभी का एक जैसा ही जवाब पाया की दरी, कंबल, और गद्दे मिलते है। पर इसके आलावा और कुछ भी नहीं जानते। जिन लोगो तक ये बात भी नहीं पहुँचती की उनको सरकार के क्या क्या सुविधा मिल रही है। तो वो सरकार से क्या मांगे रखेंगे?? हलाकि बेघर लोगो ने सरकार के रैन बसेरे की तारीफ भी की है, ठंड के दौरान ठंड से बचने के लिए आश्रय घर हमारे सिर पर छत की तरह होता है। यह हमारे बचाव के लिए बहुत काम आता है। दिल्ली सरकार द्वारा ये कहा जाता है की बेघरों के लिए कौशल विकास योजना है, सभी स्थान पर डॉक्टर की टीम जाती है पर जमीनी स्तरपर आज भी लोग रोजगार और स्वस्थ्य की अपेक्षा करते है, कही ना कही सरकार के दावे खोखले साबित होते नजर आते है। bsp24news 6264105390