**यूथ कांग्रेस का चुनाव लड़ रहे लाडनूं विधायक मुकेश भाकर ने भी नहीं समझा** धुड़िला के अपाहिज भागीरथ सिंह का दर्द* भीलवाड़ा, राजस्थान (भैरू सिंह राठौड़) कहते हैं कि जब इन्सान के ऊपर दुःखों का कहर बरसता है तो वह चारों तरफ से टूटा हुआ महसूस करता है और जब घर की रोजी-रोटी कमाने वाला घर का मुख्या ही दुर्घटनाग्रस्त हो जाएं तो मानो उस परिवार पर दुःखों का पहाड़ टूट पड़ना निश्चित है, और जब वो परिवार पर्दा प्रथा वाला राजपूत खानदान से ताल्लुक रखता हो तो उस परिवार पर बेपनाह मुश्किलों का अंबार लग जाता है। ज़ी हां हम बात कर रहे हैं राजस्थान के नागौर जिले की लाडनूं तहसील के धुड़िला गांव के 48 वर्षिय भागीरथ सिंह कानावत की जो ठीक आज से 4 साल पहले एक प्राइवेट कंपनी में नौकरी करके मिलने वाले पैसों से अपने परिवार का पालन-पोषण कर रहे थे मगर होनी को कुछ और ही मंजूर था। 4 मार्च 2016 को भागीरथ सिंह और उनके चचेरे भाई बाइक से शहर से घर आते समय किसी अज्ञात वाहन की चपेट में आकर दुर्घटनाग्रस्त हो गए। इस घटना में सर में चौट लगने के साथ ही दोनों पैरों की हड्डीयां टूट गई और भागीरथ सिंह अपाहिज हो गए। जिसका इलाज जयपुर के फोर्टिस और सिकर के के.डी. मिश्रा अस्पताल में इलाज चला। जिसमें करीब दस लाख रुपए इलाज में ख़र्च हो गए, फिर भी इलाज पूरा एवं सही तरीके से नहीं हो पाया। भागीरथ सिंह की पत्नी रेशम कंवर ये सदमा बर्दाश्त नहीं कर सकी। वो भागीरथ सिंह की दयनीय हालत देख देख कर रोज़ जार जार रोती रही और आज भी रोती है। बहुत अधिक रुदन से अपनी आंखों की रोशनी खो बैठी जिससे उसकी पत्नी की आंखों की रोशनी 70% तक जा चुकी है। भागीरथ सिंह के बड़े लड़के कुलदीप सिंह की आंखों की नजर बचपन से ही कमजोर है डॉक्टरों के मुताबिक मेंटल रिटायर्ड नेस हैं और उसकी आंखों में 68% नजर नहीं है। भागीरथ सिंह का छोटा बेटा दिपेंद्र सिंह नवीं कक्षा में अध्ययनरत हैं पर परिवार की मुफलिसी भी उसकी पढ़ाई में पुरी तरह बाधा बन रही है। भागीरथ सिंह ने इस संवाददाता भैरू सिंह राठौड़ को अपना दर्द बयां करते हुए बताया कि उसने अपने इलाज के लिए 2014 में डिडवाना भूमि विकास बैंक से डेढ़ लाख रुपए का लोन लिया था फिर भी इलाज पूरा नहीं हुआ और बैंक के लोन की राशि भी अब 3 लाख रुपए हो चुकी है। बैंक वालों की नजर अब उसकी जमीन पर टिकी हुई है और वो उसे बार बार परेशान कर रहे हैं। उसके परिवार की आर्थिक तंगी और घर में कोई कमाने वाला नहीं होने के कारण भागीरथ सिंह का परिवार भंयकर आर्थिक तंगी के दौर से गुज़र कर नारकीय जीवन व्यतीत कर रहा है। ऐसा नहीं कि भागीरथ सिंह ने अपने पारिवारिक दर्द की हाजरी नेताओं के दर पर नहीं लगाई हो उन्होंने बहुत से नेताओं मंत्रियों के दर पर मदद की गुहार लगाई पर नतीजा वही ढाक के तीन पात और मिला तो सिर्फ आश्वासन। भागीरथ सिंह ने मदद की गुहार पुर्व की भाजपा सरकार में सहकारिता मंत्री रहे अजय सिंह किलक के डेगाना स्थित उनके निवास पर भी लगाई थी मगर वहां से भी आश्वासन और तारीख पर तारीख के सिवा कुछ नहीं मिला। यही नहीं वर्तमान लाडनूं विधायक और यूथ कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष पद का चुनाव लड़ रहे मुकेश भाकर के पास उनके आफिस में भी आवश्यक कागजात जमा करवा कर लगातार चार बार चक्कर काटने के बाद भी आश्वासन तो मिला पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई जिससे भागीरथ सिंह के हालातों से मजबूर परिवार को यथासंभव मदद मिल सके। भागीरथ सिंह ने इस संवाददाता भैरू सिंह राठौड़ को बार-बार अपना और अपने परिवार का असहनीय दर्द को रुहांसे होते हुए बताया कि उसने अपने और अपने परिवार का वर्तमान कांग्रेस के लाडनूं विधायक और अभी युवक कांग्रेस के प्रदेशअध्यक्ष पद पर चुनाव लड़ रहे मुकेश भाकर को अपने गांव के प्रभावी लोगों के माध्यम से भी अवगत कराया मगर कोई फायदा नहीं हुआ है। और न आज दिन तक कहीं से किसी तरह की कोई मदद मिली है। अगर विधायक मुकेश भाकर चाहते तो अभी उनकी राज्य में कांग्रेस सरकार है सरकार से मदद दिला सकते थे लेकिन उन्होंने मेरे परिवार के दर्द को कोई तवज्जो नहीं दी है। भागीरथ सिंह ने बड़ी पीड़ा से बताया कि वर्तमान कांग्रेस विधायक मुकेश भाकर ने मदद करने में भी पूरी तरह राजनीतिकरण कर दिया है जबकि जीतने के बाद तो विधायक आम जनता का होता है। भागीरथ सिंह को सहसा यकीन नहीं था कि एक विधायक की भावनाएं इतनी मर जाएंगी कि एक विधायकी और राजनीति के गुरुर और नशें में आम जनता के दुःख दर्द का भी कोई ख्याल नहीं रहेगा। भागीरथ सिंह ने कांग्रेस सरकार को जबरदस्त कोसते हुए बताया कि चुनाव के दौरान ऋण माफी में दो लाख रुपए की घोषणा की थी, मगर सरकार की वो घोषणा भी थोती ही साबित हुई। ऋण माफी की घोषणा में उसे रति भर भी फायदा नहीं हुआ है। आज भागीरथ सिंह अपने परिवार की माली हालत के चलते दर दर की ठोकरें खाने को मजबूर हैं। एक विधायक का ऐसे में राजनीतिकरण करते हुए आम जनता की मदद नहीं करना भी विधायक बनने पर विधानसभा में ली जाने वाली शपथ पर कड़ा सवालिया निशान लगाता है। पुर्व की भाजपा सरकार में मंत्री रहे अजय सिंह किलक और वर्तमान कांग्रेस विधायक मुकेश भाकर ने आमजन के साथ भेदभाव करते हुए यह साबित कर दिया है कि वो सिर्फ एक बार वोट मांगने जनता के बीच में जाते हैं और जीत जाने पर वो पांच साल में आम जनता को बार-बार रुलाते हैं। जैसे बार बार इन नेताओं के चक्कर लगाकर भागीरथ सिंह को रुलाया है अब वो निराश और हताश हो कर अपने घर बैठ गया है। उसे कहीं से भी मदद की कोई किरण दिखाई नहीं दे रही है। वाकई भागीरथ सिंह का दर्द शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता है क्योंकि दर्द ही बेशुमार इतना है कि उस दर्द के लिए शब्द ही कम पड़ जाएंगे। उसे तो बस सिर्फ दिल में महसूस किया जा सकता है। रिपोर्टर भैरू सिंह राठौड़ की खास रिपोर्ट भीलवाड़ा (राजस्थान)09799988158 bsp24news 6264105390

**यूथ कांग्रेस का चुनाव लड़ रहे लाडनूं विधायक मुकेश भाकर ने भी नहीं समझा** धुड़िला के अपाहिज भागीरथ सिंह का दर्द* भीलवाड़ा, राजस्थान (भैरू सिंह राठौड़) कहते हैं कि जब इन्सान के ऊपर दुःखों का कहर बरसता है तो वह चारों तरफ से टूटा हुआ महसूस करता है और जब घर की रोजी-रोटी कमाने वाला घर का मुख्या ही दुर्घटनाग्रस्त हो जाएं तो मानो उस परिवार पर दुःखों का पहाड़ टूट पड़ना निश्चित है, और जब वो परिवार पर्दा प्रथा वाला राजपूत खानदान से ताल्लुक रखता हो तो उस परिवार पर बेपनाह मुश्किलों का अंबार लग जाता है। ज़ी हां हम बात कर रहे हैं राजस्थान के नागौर जिले की लाडनूं तहसील के धुड़िला गांव के 48 वर्षिय भागीरथ सिंह कानावत की जो ठीक आज से 4 साल पहले एक प्राइवेट कंपनी में नौकरी करके मिलने वाले पैसों से अपने परिवार का पालन-पोषण कर रहे थे मगर होनी को कुछ और ही मंजूर था। 4 मार्च 2016 को भागीरथ सिंह और उनके चचेरे भाई बाइक से शहर से घर आते समय किसी अज्ञात वाहन की चपेट में आकर दुर्घटनाग्रस्त हो गए। इस घटना में सर में चौट लगने के साथ ही दोनों पैरों की हड्डीयां टूट गई और भागीरथ सिंह अपाहिज हो गए। जिसका इलाज जयपुर के फोर्टिस और सिकर के के.डी. मिश्रा अस्पताल में इलाज चला। जिसमें करीब दस लाख रुपए इलाज में ख़र्च हो गए, फिर भी इलाज पूरा एवं सही तरीके से नहीं हो पाया। भागीरथ सिंह की पत्नी रेशम कंवर ये सदमा बर्दाश्त नहीं कर सकी। वो भागीरथ सिंह की दयनीय हालत देख देख कर रोज़ जार जार रोती रही और आज भी रोती है। बहुत अधिक रुदन से अपनी आंखों की रोशनी खो बैठी जिससे उसकी पत्नी की आंखों की रोशनी 70% तक जा चुकी है। भागीरथ सिंह के बड़े लड़के कुलदीप सिंह की आंखों की नजर बचपन से ही कमजोर है डॉक्टरों के मुताबिक मेंटल रिटायर्ड नेस हैं और उसकी आंखों में 68% नजर नहीं है। भागीरथ सिंह का छोटा बेटा दिपेंद्र सिंह नवीं कक्षा में अध्ययनरत हैं पर परिवार की मुफलिसी भी उसकी पढ़ाई में पुरी तरह बाधा बन रही है। भागीरथ सिंह ने इस संवाददाता भैरू सिंह राठौड़ को अपना दर्द बयां करते हुए बताया कि उसने अपने इलाज के लिए 2014 में डिडवाना भूमि विकास बैंक से डेढ़ लाख रुपए का लोन लिया था फिर भी इलाज पूरा नहीं हुआ और बैंक के लोन की राशि भी अब 3 लाख रुपए हो चुकी है। बैंक वालों की नजर अब उसकी जमीन पर टिकी हुई है और वो उसे बार बार परेशान कर रहे हैं। उसके परिवार की आर्थिक तंगी और घर में कोई कमाने वाला नहीं होने के कारण भागीरथ सिंह का परिवार भंयकर आर्थिक तंगी के दौर से गुज़र कर नारकीय जीवन व्यतीत कर रहा है। ऐसा नहीं कि भागीरथ सिंह ने अपने पारिवारिक दर्द की हाजरी नेताओं के दर पर नहीं लगाई हो उन्होंने बहुत से नेताओं मंत्रियों के दर पर मदद की गुहार लगाई पर नतीजा वही ढाक के तीन पात और मिला तो सिर्फ आश्वासन। भागीरथ सिंह ने मदद की गुहार पुर्व की भाजपा सरकार में सहकारिता मंत्री रहे अजय सिंह किलक के डेगाना स्थित उनके निवास पर भी लगाई थी मगर वहां से भी आश्वासन और तारीख पर तारीख के सिवा कुछ नहीं मिला। यही नहीं वर्तमान लाडनूं विधायक और यूथ कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष पद का चुनाव लड़ रहे मुकेश भाकर के पास उनके आफिस में भी आवश्यक कागजात जमा करवा कर लगातार चार बार चक्कर काटने के बाद भी आश्वासन तो मिला पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई जिससे भागीरथ सिंह के हालातों से मजबूर परिवार को यथासंभव मदद मिल सके। भागीरथ सिंह ने इस संवाददाता भैरू सिंह राठौड़ को बार-बार अपना और अपने परिवार का असहनीय दर्द को रुहांसे होते हुए बताया कि उसने अपने और अपने परिवार का वर्तमान कांग्रेस के लाडनूं विधायक और अभी युवक कांग्रेस के प्रदेशअध्यक्ष पद पर चुनाव लड़ रहे मुकेश भाकर को अपने गांव के प्रभावी लोगों के माध्यम से भी अवगत कराया मगर कोई फायदा नहीं हुआ है। और न आज दिन तक कहीं से किसी तरह की कोई मदद मिली है। अगर विधायक मुकेश भाकर चाहते तो अभी उनकी राज्य में कांग्रेस सरकार है सरकार से मदद दिला सकते थे लेकिन उन्होंने मेरे परिवार के दर्द को कोई तवज्जो नहीं दी है। भागीरथ सिंह ने बड़ी पीड़ा से बताया कि वर्तमान कांग्रेस विधायक मुकेश भाकर ने मदद करने में भी पूरी तरह राजनीतिकरण कर दिया है जबकि जीतने के बाद तो विधायक आम जनता का होता है। भागीरथ सिंह को सहसा यकीन नहीं था कि एक विधायक की भावनाएं इतनी मर जाएंगी कि एक विधायकी और राजनीति के गुरुर और नशें में आम जनता के दुःख दर्द का भी कोई ख्याल नहीं रहेगा। भागीरथ सिंह ने कांग्रेस सरकार को जबरदस्त कोसते हुए बताया कि चुनाव के दौरान ऋण माफी में दो लाख रुपए की घोषणा की थी, मगर सरकार की वो घोषणा भी थोती ही साबित हुई। ऋण माफी की घोषणा में उसे रति भर भी फायदा नहीं हुआ है। आज भागीरथ सिंह अपने परिवार की माली हालत के चलते दर दर की ठोकरें खाने को मजबूर हैं। एक विधायक का ऐसे में राजनीतिकरण करते हुए आम जनता की मदद नहीं करना भी विधायक बनने पर विधानसभा में ली जाने वाली शपथ पर कड़ा सवालिया निशान लगाता है। पुर्व की भाजपा सरकार में मंत्री रहे अजय सिंह किलक और वर्तमान कांग्रेस विधायक मुकेश भाकर ने आमजन के साथ भेदभाव करते हुए यह साबित कर दिया है कि वो सिर्फ एक बार वोट मांगने जनता के बीच में जाते हैं और जीत जाने पर वो पांच साल में आम जनता को बार-बार रुलाते हैं। जैसे बार बार इन नेताओं के चक्कर लगाकर भागीरथ सिंह को रुलाया है अब वो निराश और हताश हो कर अपने घर बैठ गया है। उसे कहीं से भी मदद की कोई किरण दिखाई नहीं दे रही है। वाकई भागीरथ सिंह का दर्द शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता है क्योंकि दर्द ही बेशुमार इतना है कि उस दर्द के लिए शब्द ही कम पड़ जाएंगे। उसे तो बस सिर्फ दिल में महसूस किया जा सकता है। रिपोर्टर भैरू सिंह राठौड़ की खास रिपोर्ट भीलवाड़ा (राजस्थान)09799988158 bsp24news 6264105390

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