अमरकंटक :- श्रवण उपाध्याय
पवित्र नगरी अमरकंटक में आज 14 जनवरी दिन शुक्रवार को मकर संक्रांति के अवसर पर सुबह से ही भारी भीड़ देखने को मिली , जहां लोगों ने सर्वप्रथम मां नर्मदा स्नान कुंड व रामघाट तथा पवित्र नदी में डुबकी लगाकर स्नान कर सूर्य देव को अर्घ दिए , उसके बाद उद्गम स्थल मंदिर पहुच मां नर्मदा जी की पूजन व दर्शन पश्चात अन्य मंदिरो के भी दर्शन कर यंहा के अनेक पर्यटक स्थलों का भ्रमण कर लोग आनंदित भी हुए लेकिन दोपहर बाद बरसात शुरू हो जाने से श्रद्धालु तथा टूरिस्टों को ठंड का सामना करना भी पड़ा । आज सुबह से हजारों की संख्या में लोग मकरसंक्रांति के पावन अवसर पर लोग पहुंचे तथा मंदिर में दर्शन हेतु लंबी लंबी कतारो के बीच लगना पड़ा । मंदिर प्रांगण के ब्यवस्था हेतु लाउडीस्पीकर से सूचना दी जा रही थी कि मास्क लगाकर ही प्रवेश करें , दो गज की दूरी बनाए रखे , स्नान कुंड में तैरे नही , तेल , साबुन का प्रयोग न करे । प्रशासन बढ़ते कॅरोना के चलते यंहा आज ज्यादा फिक्रमंद नही दिखी । मकर संक्रांति में डुबकी लगाने का बहुत अधिक महत्व है जिस कारण दूर-दूर से पहुंचे श्रद्धालु पवित्र नदी में स्नान किया और मां नर्मदा जी का पूजन अर्चना कर माथा टेका ।

मकर संक्रांति के महात्म्य को बताते हुए संत लवलीन महाराज ने बताया कि मकरसंक्रांति संक्रमण काल है , इस संक्रमण काल मे सूर्य की राशि बदलती है । अध्यात्म में इसे अज्ञान से ज्ञान का सूर्योदय मानते है अर्थात हमारी समस्त बुराईयां तिल के समान है जो गुड़ रूपी अच्छाई से मिलकर दूर हो जाती है ।
मकरसंक्रांति को भगीरथ ने अपने पूर्वजो का गंगाजल , अक्षत , तिल से तर्पण किया था तब से ही माघ मकरसंक्रांति स्नान और श्राद्ध तर्पण की प्रथा भी प्रचलित है । इसलिए आज के दिन पवित्र जल में स्नान कर तर्पण भी करना चाहिए । माँ नर्मदा मोक्ष दायनी है , सभी पापों को नष्ट कर देने वाली है ।