परमवीर योगेंद्र ने बच्चो को पढ़ाया वीरता का पाठ, कल्याणिका स्कूल में शूरवीर का हार्दिक अभिनंदन

अमरकंटक – श्रवण उपाध्याय :-

देश के सर्वोच्च सैन्य सम्मान परमवीर चक्र को सबसे कम उम्र 19 वर्ष में प्राप्त करने वाले शूरवीर श्री योगेन्द्र सिंह यादव का कल्याणिका केंद्रीय शिक्षा निकेतन अमरकंटक में भावभीनी स्वागत व अभिनंदन किया गया। उल्लेखनीय है की जुलाई 1999 में कारगिल युद्ध के दौरान 21 लोगों के घातक प्लाटून में एकमात्र जीवित बचे सूबेदार मेजर श्री यादव खुद 17 गोलियों से छलनी थे फिर भी उन्होंने चट्टानों के पीछे से सबको मृत मानकर वापस जा रही टुकड़ी पर तीन अलग अलग स्थानों से पाकिस्तानी सैनिकों को चकमा देकर खदेड़ा और पाकिस्तानी पोस्ट की टोह लेकर नीचे आकर इसकी जानकारी भारतीय पोस्ट में दी फिर सूचना के आधार पर भारतीय सेना ने पूरी तैयारी के साथ द्रास सेक्टर की सबसे ऊंची चोटी टाइगर हिल में हमला कर वहां पाकिस्तानी पोस्ट ध्वस्त कर तिरंगा लहराया था। छलनी शरीर एक हाथ और पैर पूरी तरह से नाकाम हो जाने के बाद भी 17000 फीट ऊंची लुढ़कते हुए नीचे आकर अपनी पोस्ट पर वहां की पूरी सूचना देने का जो अद्भुत पराक्रम महज 19 वर्ष की आयु श्री यादव ने किया, इसके लिए उन्हें 1999 में देश का सबसे बड़ा सैनिक सम्मान परमवीर चक्र दिया गया। अभी तक सिर्फ 21 को यह जांबाज सैनिकों को यह सम्मान मिला है, जिनमे तीन को जीवनकाल में शेष को मरणोपरांत मिला। श्री यादव ने श्री कल्याण सेवा आश्रम का भी भ्रमण किया जहां स्वामी हिमाद्रि मुनि जी महाराज व स्वामी जगदीशानंद जी ने उनका स्वागत एवम् सौजन्य भेंट की।

सर्वप्रथम जैसे ही श्री यादव का विद्यालय आगमन हुआ उनका स्वागत विद्यालय के प्रबंधक श्री हनुमान दास, प्राचार्या डॉक्टर श्रीमती अर्चना राव, उपप्राचार्य श्री रघुनाथ पत्र, राजेंद्रग्राम कल्याणिका के प्राचार्य श्री जितेन्द्र निगम, एवम् श्री एम के शर्मा ने किया । विद्यालय के छात्रों ने प्रशासक श्री अनिकेत अवस्थी के निर्देशन में बैंड में राष्ट्रीय भक्ति ध्वनि बजाकर उनका अभिनंदन किया। विद्यालय के भव्य हंसवाहिनी प्रेक्षागृह में प्रवेश करते ही शिक्षक एवम् छात्रों ने भारतमाता के जयघोष और करतल ध्वनि से देश के इस सच्चे सपूत का स्वागत किया। उनके प्रवेश मात्र से प्रेक्षागृह का संपूर्ण माहौल राष्ट्रप्रेम से अभिभूत हो गया। तत्पश्चात डा.श्रीमती राव, श्री पात्रा व श्री अवस्थी ने कार्यक्रम में उपस्थित सभी अतिथियों का तिलक, श्रीफल, शाल और पुष्पगुच्छ से स्वागत किया। बच्चो में संगीत शिक्षक श्रीकांत पांडे के निर्देशन में स्वागत गीत प्रस्तुत किया। विद्यालय की प्राचार्य ने अपने उद्बोधन में श्री यादव के जीवन पर प्रकाश डालते हुए कहा कि आजतक हमने वीरगाथाये पढ़ी और सुनी हैं किंतु आज अपने बीच एक वीरगाथा व पराक्रम के अद्भुत नायक से साक्षात्कार हम सबको रोमांचित कर रहा है। कार्यक्रम का संचालन कर रहे शिक्षक डा. श्रीराम त्रिपाठी ने जब श्री यादव को उनकी कहानी उन्हीं की जुबानी सुनाने के लिए मंच पर आमंत्रित किया तो एक बार फिर प्रेक्षागृह भारतमाता के जयघोष और वन्देमातरम से गूंज गया।

श्री यादव ने अपने प्रेरणादायी संबोधन में कहा कि मै भी आप सबकी तरह एक आप आदमी हूं, और हम सब सौभाग्यशाली हैं की हमने वीर वीरांगनाओं के खून से सिंचित, साधु संतो के जप तप और त्याग से दीक्षित इस भारतभूमि में जन्म लिया है। हमारे त्याग की कोई सीमाएं नहीं, बस जन्मभूमि के प्रति आस्था, निष्ठा और विश्वास रखिए तथा जो भी कर्म आप कर रहें हैं इस देश के लिए करिये। उन्होंने टाइगर हिल फतेह की जो कहानी बतायी उसे सुनकर पूरे कार्यक्रम में मौन छा गया। उन्होंने कहा कि मेरी महज 19 साल की उम्र में मेरी मानसिक व शारीरिक दृढ़ता के चलते 21 लोगों के घातक प्लाटून में शामिल कर हमे 17000 फीट टाइगर हिल कि ओर जहां पाकिस्तानियों ने अपनी पोस्ट बना ली थी उसे तबाह करने भेजा गया। दुश्मन ऊपर था और हम नीचे हमे लगभग 90 डिग्री जैसी पहाड़ी पर सतर्कता के साथ चढ़ना था। हम रातभर चलते और दिनभर चट्टानों के पीछे बिना हलचल के के छिपे रहते रहते। हम शायद सिर्फ टाइगर हिल से 50 से 80 मीटर ही मीटर ही नीचे थे रात में ऊपर चढ़ने के लिए रस्सी बांध रहे थे की कुछ पत्थर नीचे आ गिरे और हमारी चहलकदमी से आहट पाकर पाकिस्तानी सैनिक जो दोनो साइड बंकरों में सो रहे थे जिसका हमें आभास भी नही था उन्होंने हमारे ऊपर फायरिंग शुरू कर दी। हमने सभी को मौत की नींद सुला दिया पर हम भी 21 में से सिर्फ सात बचे शेष वीरगति को प्राप्त हो गए। अपने साथियों की शहादत ने हमे और बदले की आग में जला दिया। हम और ऊपर चढ़े फिर हमे ऊपर से घात लगाए बैठे पाक सैनिकों ने मोर्टार, ग्रेनेड फेंकना और गोलीबारी शुरू कर दी धीरे धीरे मेरे और भी साथी शहीद हो गए , मै भी बुरी तरह चोटिल था और अपने आपको मृतप्राय मान बैठा था। उनके सैनिक आए उन्होंने हम सबको मरा मानकर हम पर नजदीक से गोलियां बरसायी लेकिन मैंने उफ्फ तक नही किया और वापस जाने लगे। उनकी पैर की ठोकर से मुझे चेतना आयी की में जिंदा हूं और वापस जाते पाक सैनिकों में से एक पर मैंने ग्रैंड फेंका उसका सिर धड़ से अलग हो गया फिर मैंने तीन अलग अलग दिशाओं से अपने एक हाथ से उनपर फायरिंग की और वो यह सोचकर कि भारतीय सेना की दूसरी टुकड़ी यहां आ गई भाग निकले। मैने उनकी पूरी पोस्ट को दूर से देखा उनकी तैयारी और हमले की बात सुनी। अब मुझे यह जानकारी अपनी पोस्ट पर पहुंचाना था किंतु मेरा शरीर 17 गोलियों से छलनी था, एक हाथ और पैर पूरी तरह से खराब हो चुके थे। इस बात का भी आभास नही था की किधर भारत और किधर पाकिस्तान । अचानक मैंने चट्टानों में लुढ़कना शुरू किया और अपनी पोस्ट पर पहुंचकर ऊपर के पूरे हालातों की जानकारी उन्हें और कमांडिंग ऑफिसर को दी और बेहोश हो गया। बस इतना गुमान था की यदि अभी नहीं मारा तो अब नहीं मरूंगा और दो साल से अधिक अस्पताल में भर्ती रहने के बाद आज आपके सामने हूं। बच्चो हम सब सैनिक और भारतमता की संतान हैं बस इस मातृभूमि के प्रति अपनी आस्था और निष्ठा से अपने अपने कर्म के प्रति समर्पित रहें।
अभिनंदन समारोह के सफल आयोजन में आर्ट एंड क्राफ्ट शिक्षक की साजसज्जा एवम् अविनाश पटनायक की श्री यादव पर बनाई गईं डॉक्यूमेंट्री फिल्म को भी सभी ने सराहा। कार्यक्रम के अंत में स्वामी हनुमान दास जी ने सभी उपस्थित अतिथियों के प्रति आभार ज्ञापित किया।

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