संतो ने श्रावण मास के तीसरे सोमवार को पैदल चलने वाले कांवड़ियों को बांटा फल और गीता ।

अमरकंटक / श्रवण उपाध्याय
मां नर्मदा जी की उद्गम स्थली / पवित्र नगरी अमरकंटक में श्रावण मास के तीसरे सोमवार को पधारे शिवभक्त पैदल चलकर जालेश्वर धाम जल लेकर जाने वाले श्रद्धालु और वापस आने वाले भक्तों को परमहंस धारकुंडी आश्रम के संत बाबा लवलीन जी महाराज के सानिध्य में स्वामी विमलानंद जी महाराज ने अपने वाहन से जालेश्वर जाने वाले मार्ग पर पैदल चल रहे सैकड़ों शिवभक्त कांवड़ियों को फल , बिस्कुट आदि वितरण कर उनकी थकान को कम करने का प्रयत्न किया । साथ ही काफी संख्या में लोगो को संत जी ने यथार्थ गीता की पुस्तके निःशुल्क बांटी ताकि भक्ति के साथ ज्ञान भी अर्जित किया जा सके ।

यथार्थ परमार्थ सेवा समिति खेमापुर भदोही के संत विमलानन्द जी महाराज अमरकंटक भ्रमण के दौरान उन्होंने अमरकंटक व क्षेत्र के अनेक ग्रामों में शिक्षा के साथ ही साथ आध्यात्मिक शिक्षा का ज्ञान जन जन तक पहुंचाने का कार्य कर रहे है । कई जगहों पर केन्द्र भी खोलने का प्रयास किया जा रहा है । संत द्वारा बताया गया और अपील भी करते हुए उन्होंने कहा की बच्चो , युवाओ , माताओं , बहनों , भाईयो को धर्मशास्त्र का ज्ञान होना बहुत ही आवश्यक है । उनमें सहिष्णुता , सत्य असत्य का ज्ञान , सनातन धर्म के प्रति विश्वास और निष्काम कर्म की भावना का विकास हो । आज के बच्चे कल के भविष्य है । श्रीमद्भागवत गीता , श्रीरामचरित मानस , यथार्थ गीता , धर्मग्रंथ और महापुरुषों की जीवनी हमे जीवन जीने का सही मार्गदर्शन प्रदान करती है । लोगो को अपने परिवार , बच्चों को ऐसे धर्मग्रंथों का अध्ययन जरूर करनी और करानी चाहिए जिससे देश में फैली भ्रांतियां और कुमार्गों में जाने से बचा जा सके , इसी में मानव जीवन का उद्धार संभव है ।

देश के अनेक प्रांतों में लगभग आठ हजार से ज्यादा बच्चे / बच्चियों को निःशुल्क आध्यात्मिक शिक्षा प्रदान की जा रही है । बहुत ही जल्द संत विमलानन्द जी द्वारा अमरकंटक व आस पास के क्षेत्रों में धर्मशास्त्र और अध्यात्म की शिक्षा प्रदान की जावेगी साथ ही एक पहला केंद्र अमरकंटक के धारकुंडी आश्रम में खोल कर निःशुल्क यथार्थ गीता , बाल गीता , धर्मग्रंथों की जानकारी दी जावेगी । शनै शनै अन्य ग्रामों, शहरों में धर्मग्रंथों , यथार्थ गीता , श्रीराम चरित मानस आदि की शिक्षा निःशुल्क दी जावेगी ।

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