राजस्थानी सभ्यता एवं संस्कृति को लेकर पूरा परिवार चलता है हमारा — सरूपा राम

संवाददाता / श्रवण उपाध्याय

अमरकंटक / मां नर्मदा जी की उद्गम स्थली , पवित्र नगरी अमरकंटक मध्य प्रदेश के प्रमुख पर्यटन एवं धार्मिक तीर्थ स्थल अमरकंटक में राजस्थान प्रांत के सरोई जिला के देवधा ग्राम एवं तहसील के किसान 18 सदस्यीय संयुक्त परिवार के मुखिया सरूपा राम जी जो परिवार के मुखिया हैं उन्होंने अपने सभी परिवारजनों के साथ पतित पावनी मां नर्मदा जी के उद्गम स्थली में स्नान , दर्शन , पूजन और अर्चन के लिए आए हुए हैं । उन्होंने स्पष्ट करते हुए कहा कि हम संयुक्त परिवार में रहते हैं । सभ्यता एवं संस्कृति से हटकर एक कदम भी आगे नहीं चलते । जो मैं कह देता हूं , वह पूरा परिवार मानता है ।

सभी मुझको आदर देते हैं । मैने उनको भी उतना ही आदर सत्कार भाव प्रेम रखता हूं । उन्होंने आगे कहा कि भले ही बहुत ज्यादा विकास हो गया है लेकिन हम अपने पूर्वजों के कहने एवं बताए गए मार्गो के अनुसार ही चलते हैं । इसलिए आप देख रहे होंगे कि हमारा रहन-सहन एवं वस्त्र आभूषण आज भी पूर्ववत चल रहा है । महिलाएं आज भी अपने देश के रीति रिवाज एवं भेष भूसा के अनुसार रहती हैं तथा उसी अनुसार आभूषण तथा कपड़े आदि पहनती हैं तथा पारंपरिक संस्कृति के तहत लोकगीत का गायन भी करती हैं । हम सभी लोगों का बाबा रामदेव जी महाराज है जो हमारे आराध्य गुरुदेव हैं । उन पर पूरा विश्वास है , उनके बिना कुछ भी नहीं होता । उनके आशीर्वाद से ही हम सब का कारोबार खेती-बाड़ी तथा शादी ब्याह होता है । बाबा रामदेव जी का पारंपरिक भजन महिलाओं ने गाकर सुनाया तथा महिलाओं ने कहा कि बाबा सबका भला करते हैं । बाबा के नाम पर विश्वास रखो तो राजस्थान के रेतीले जगह में भी दो-तीन फीट में पानी मिल जाता है । हम सब लोग भी खेती किसानी करते हैं , वही हमारे जीने का आधार है । हम सब एक ही छत के नीचे रहते हैं । 25–26 लोगो का हमारा एक संयुक्त परिवार है जो बड़े मुखिया को सम्मान देते हैं । वह हमारे लिए आदेश है उसके आगे पीछे कोई कुछ नहीं कर सकता । राजस्थान के सरोई जिला से दो चौपहिया वाहन से अपने 18 सदस्यों को लेकर नर्मदा जी के स्नान दर्शन पूजन अर्चन के लिए आए हुए हैं । राजस्थान में अमरकंटक एवं नर्मदा जी का बहुत नाम है । इसके पहले भी वह अपने घर के लोगों को मैहर चित्रकूट बनारस प्रयागराज महाकुंभ तथा अयोध्या घुमा चुके हैं ।

सरुपा राम जी के साथ , भलाराम जी, देवासी कोला, दूधा जी, खाटोणा राम, भिखा जी कालोर, मकावल, हमीर जी हुण, रेवदर कसना जी, मछुआरा पादर, त्रिकमाराम भटाणा, जोधा राम, प्रभु राम भटाणा, दिपी देवी आदि आए हुए हैं जो की दर्शन पूजन अर्चन कर जबलपुर होते हुए उज्जैन होकर वापस लौट जाएंगे । सभी जनों ने कहा कि अमरकंटक हमको बहुत अच्छा लगा । यहां का मौसम बहुत अच्छा है । हमारे यहां तो बहुत ज्यादा गर्मी अभी भी है , पर यहां बहुत अच्छा मौसम है ।

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