हरतालिका तीज व्रत निर्जला 36 घंटों तक रखा जाता है पंडित मुकेश पाठक
संवाददाता – श्रवण उपाध्याय
अमरकंटक – मां नर्मदा की उद्गम स्थली / पवित्र नगरी अमरकंटक में हरतालिका तीज पर्व बड़ी श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया गया । रात बारह बजे दातुन (मुखारी) कर व्रत का शुभारंभ किया जाता है । सुबह 4 बजे सुहागिन महिलाएं मौन धारण कर स्नान करती है । स्नान नदी , तालाब , कुंआ आदि जो व्यवस्था होती है । अमरकंटक में नर्मदा स्नान करने हजारों हजारों परिवार के लोग पहुंचे । स्नान बाद मंदिरों में पूजन अर्चन कर धर्म लाभ प्राप्त किया । इसके बाद घर पर ही मिट्टी से पवित्रता के साथ शिव-पार्वती के अलावा कई जगह गणेश , कार्तिक की प्रतिमाये बनाकर पूजन हेतु फुलेहरा के नीचे रखा गया ।

दिनभर महिलाओं ने निर्जला व्रत रखकर पारंपरिक पकवान , मिठाइयां व सलोनी-गुझिया बनाकर पूजन की तैयारी की । नगर के अनेक जगह घर-घर में फुलेहरा का झूला डालकर उसके नीचे भगवान शिव-पार्वती व अन्य प्रतिमाएं स्थापित की गईं । जिन घरों में फुलेहरा झुला नहीं डालते उन घरों के लोग पड़ोस में जाकर पूजन कर लेते है । पंडितों द्वारा मंत्रोच्चार के बीच सामूहिक पूजन हुआ । पूजन उपरांत भगवान नाम संकीर्तन , भजन और कीर्तन गूंजते रहे । अगली सुबह पुनः स्नान कर भगवान को आरती कर भोग अर्पित किया गया तथा आरती के बाद फुलेहरा व पूजन सामग्री आदि का विसर्जन किया गया । इसके उपरांत महिलाओं ने व्रत का समापन किया ।

यह व्रत पति की लंबी आयु , दांपत्य जीवन की सुख-शांति और परिवार के मंगल की कामना से किया जाता है । नगर के अनेक घरों में महिलाओं ने श्रद्धा-भाव से व्रत कर भोले बाबा व माता पार्वती से आशीर्वाद मांगा ।

पंडित मुकेश पाठक
पंडित मुकेश पाठक ने कहा कि यह तीज का निर्जला व्रत 36 घंटे का बहुत कठिन होता है । इस व्रत में पानी पीना भी वर्जित है । पति की लंबी आयु और सुखी वैवाहित जीवन की कामना हेतु रखा जाता है ।
तीजा पर्व के अवसर पर हजारों श्रद्धालुओ ने माता नर्मदा जी की उद्गम स्थली पहुंच स्नान किया व मंदिरों में पूजन-अर्चन कर श्रद्धा भक्ति में लीन रहे ।