अमरकंटक। :- श्रवण उपाध्याय
पवित्र नगरी व नर्मदा जी की उद्गम स्थळी में स्थित गीता स्वाध्यायी मंदिर में स्वामी नर्मदानंद गिरी जी महाराज के सानिध्य में 25 सितंबर से 02 अक्टूबर तक श्री श्री 108 श्री स्वामी ब्रम्हेन्द्रानंद गिरी जी की बीसवीं पुण्यतिथि के शुभ अवसर पर पितृपक्ष में माँ नर्मदा के पावन तट पर आश्रम में आयोजित भागवत महापुराण सप्ताह ज्ञान यज्ञ कथा रोजाना दोपहर 3 बजे से सायं 6 बजे तक संगीतमय कथा का श्रवण आये शिष्यों , संतो , नगर के भक्तगण भारी संख्या में रोजाना इस कथा रूपी गंगा में डुपकी लगा कर आनंद प्राप्त किये । कथा ब्याश में विराजमान श्री डॉ सत्यनारायण तिवारी (हिमांषु महाराज) लोरमी के मुखारबिंद से कथा की बहार चारों ओर फैल कर भक्तिमय वातावरण बना रही थी । ब्यासपीठ से उन्होंने सात दिवस का निचोड़ एक छोटा सा स्वरूप वाक्य में पूरा कह दिया कि भक्ति का रसपान करना है तो गुरु के पास , कथा स्थल पर ही प्राप्त होता है , जैसा कि नर्मदा का तट जंहा कण कण सब शंकर वंहा पर निवासरत मनुष्य , पशु , जीवजंतु सब पूण्य के भागी है , तपस्वी है । इसलिए जब तक ऐसी जगह पर मनुष्य नही पहुचता ज्ञान रूपी गंगा का गोता लगा नही सकता । हम भी पूण्य के भागीदार है जो ऐसे स्थानों में हमारा पहुचना सौभाग्य है ।

स्वामी नर्मदानंद गिरी जी बताते है कि यह कार्यक्रम प्रतिवर्ष स्वामी जी की पुण्यतिथि के शुभ अवसर पर किया जाता है प्रथम दिवस आश्रम से माँ के द्वार तक पुराण लेकर जाते है ढोल नगाड़ों व संकीर्तन करते हुए , उद्गम में पूजन पश्चात जल लेकर कथा स्थल में कलस स्थापित कर पूजन व पाठ रोजाना चलता है । सात दिवस कथा के उपरांत पूजन , हवन व भंडारे के साथ समाप्त होता है ।

