श्रीमत् परिव्राजकाचार्य महामंडलेश्वर स्वामी शारदानंद सरस्वती जी महाराज हुए ब्रम्हलीन ।।

अमरकंटक :- श्रवण उपाध्याय
मां नर्मदा जी की उद्गम स्थली/पवित्र नगरी अमरकंटक में स्थापित स्वामी एकरसानंद मृत्युंजय सेवा आश्रम के संस्थापक श्रीमत परिव्राजकाचार्य महामंडलेश्वर स्वामी शारदानंद जी महाराज का कार्तिक मास के त्रयोदशी (प्रदोष) ०६-११-२०२२ को गुड़गांव के मेदांता अस्पताल में रात्रि 10 बजे के लगभग ही वे संसार यात्रा को शिव में समर्पित कर शिव आराधना करते हुए पंच भौतिक शरीर को छोड़कर शिव में लीन हो गए । अनंत विभूषित श्रोत्रिय ब्रह्म निष्ठ परिव्राजकाचार्य दैवीय संपद मंडल के परमाध्यक्ष , अनेक आश्रमों के संस्थापक को उन्हें चिकित्सालय के आपातकालीन चिकित्सा वाहन से लेकर निकले , सुबह 5 बजे एकरसानंद आश्रम मैनपुरी लाया गया जहां भारी संख्या में भक्तगण उपस्थित रहे । जहा शिष्यगणो की मंत्राणा के अनुसार तथा उनकी परंपरानुसार समस्त संस्कार सहित समाधि उनके मैनपुरी (उत्तर प्रदेश) स्थित आश्रम में दिया जायेगा ।
अमरकंटक आश्रम के संतो से चर्चानुसार आज सुबह ५ बजे से ११ बजे तक मैनपुरी आश्रम में ही भक्तों के दर्शनार्थ रखा जायेगा । उनके पार्थिव शरीर को रथ द्वारा नगर भ्रमण कराया जाएगा जिसमे विभिन्न प्रकार के वाद्य यंत्रों का वादन भी होगा । नगर वासी इनका भव्य दर्शन लाभ प्राप्त कर सकेंगे । लगभग शाम ४ बजे आश्रम प्रांगण में ही उनका समाधि विधि विधान पूर्वक किया जायेगा ।
संत जी के कर कमलों द्वारा अमरकंटक में एकरसानंद मृत्युंजय सेवा आश्रम का निर्माण कार्य २००३ में प्रारंभ हुआ था । आज एक विशाल आश्रम बनकर संतो , भक्तो व परिक्रमा वासियों आदि की सेवा में समर्पित है । संत जी द्वारा अनेक यज्ञ करवाए गए जिसके तहत एक यज्ञ वर्ष २००७ अमरकंटक में भी उनके ही मार्गदर्शन में संपन्न हुआ जो क्षेत्र के लिए एक यादगार बना हुआ है ।
ऐसा चर्चा से पता चला की वे भगवान चंद्र मौलेश्वर के अनन्य भक्त थे । वे ४० वर्षों से लगातार नित्य वैदिक परंपरानुसार शिव रुद्राभिषेक किया करते थे , उनके यह दिनचर्या में सामिल था ।
स्वामी जी महानिर्माणी अखाड़ा से आते थे और वे शैव संप्रदाय के संत थे ।
उनके इस निधन से उनके भक्त , संत w नगर में भारी शोक ब्याप्त है ।

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