अमरकंटक की वादियों पर हो रहे अतिक्रमण से जंगल संकट में – आचार्य श्री रामकृष्णानंद जी

सतपुड़ा के घने जंगल,नींद में डूबे हुए से ऊंघते अनमने जंगल,कविता में कवि का प्राकृतिक भाव ।

संवाददाता – श्रवण उपाध्याय

अमरकंटक – मां नर्मदा जी की उद्गम स्थली/पवित्र नगरी अमरकंट के मैकल , सतपुड़ा और विंध्य पर्वत मालाओं में कवि की प्राकृतिक सुंदरता और यहां के घने जंगलों का वर्णन अपनी कविता में लिखा कि सतपुड़ा के घने जंगल , नींद में डूबे हुए से , ऊंघते अनमने जंगल का भावार्थ कर बताया कि जंगल की हरियाली , वहां के जीव जंतु और प्राकृतिक सौंदर्य का चित्रण किया गया है । जंगल यहां के जीव जंतु , घने जंगलों के बारे में पहले हम किताबों में पढ़ते थे , लेकिन आज यह कहावत केवल पुस्तकों तक ही सीमित होती जा रही है ।

अमरकंटक क्षेत्र में मैकल , सतपुडा और विंध्य के पर्वत मालाओं से जुड़ा घनघोर जंगल मौजूद है । इन जंगलों में साल , हर्रा , बहेड़ा , आंवला , बरगद , पीपल जैसे वृक्षों की भरमार थी । लेकिन इन जंगलो में अब दर्शन के वृक्ष हो गए । कुछ वर्ष पूर्व एक बार साल बोरर के कीड़े वृक्ष में लगे तब से जंगल खोखला हो गया ।

वृक्षों की अवैध कटाई भी बहुत तेजी से हुई । प्रशासन भी साल के वृक्षों में लगे सारबोरर कीड़े की वजह से वृक्षों को खूब कटवाया गया ।
एक वजह और जब भारत में आईं महामारी कोविड19 समय में भी जंगल की खूब बर्बादी हुई । लोग जंगल जाते और घर बनाने , बाजार में बेचने व अन्य उपयोग के लिए जंगल की लकड़ियों का जमकर दोहन किया गया ।

अतिक्रमण से जंगल संकट में

मार्कण्डेय आश्रम के संत आचार्य स्वामी श्री रामकृष्णानंद जी महाराज ने कहा कि अमरकंटक में जितना यहां अतिक्रमण हुआ है उतना ही तेजी से जंगल संकट में आया है । अमरकंटक नगर में कुल 15 वार्ड हैं , जिनमें से अधिकांश वार्ड सीधे-सीधे घने जंगलों से सटे हुए हैं । स्थानीय निवासियों का इन जंगलों से पुराना आत्मीय रिश्ता और प्रेम रहा है ।

अमरकंटक के कई वार्डों में काफी समय से अतिक्रमण कारियों ने झुग्गी-झोपड़ियाँ और मकान बना कर रह रहे थे जिनको प्रशासन ने हटाने का कार्य किया । जहां जहां अतिक्रमण हटाया गया उन क्षेत्रों में वृक्ष के ठूंठ और सूखे वृक्ष खूब दिखे तथा कुछ उनके निशान भी समाप्त कर दिए गए , ऐसा वार्ड के कुछ लोग बताते है ।

अमरकंटक के अतिक्रमण कारियों पर लंबे समय से जिला प्रशासन अपने संज्ञान में लिया है । नगर परिषद द्वारा बीच बीच में बने नए अतिक्रमण कारियों के झुग्गी झोपड़ियो , मकानों के निर्माण पर रोक लगा रही है और साथ ही नए अतिक्रमण को हटा भी रही है । जहां पर ठूंठ और सूखे पेड़ दिखाई पड़ते है ।

अतिक्रमण कारियों के झुग्गी झोपड़ीयों के पास स्थानों पर साल के वृक्ष व अन्य प्रकार के पेड़ उनके मकान , बाड़ी में अड़चन डाल रहे तो उन वृक्षों को काट दिया जाता या उन पेड़ों को सुखा दिया जाता । जिससे जंगलों की हरियाली धीरे-धीरे समाप्त भी हो रही है । यह स्थिति बहुत ही चिंता का विषय बन रही है ।

अमरकंटक नगर परिषद के सीएमओ चैन सिंह परस्ते ने बताया कि जिन वार्डों में लोग अतिक्रमण कर झुग्गी झोपड़ी , मकान बनाए है , उन स्थानों के आस पास छोटे या बड़े पेड़-पौधों के सुखने की समस्याएं खूब सुनाई दी है । आस पास के लोग किसी का नाम न लेते हुए कहते भी है कि वृक्ष अपने आप सूख गए । लेकिन लोग बताते है वृक्ष के चारों तरफ एक हाथ छील दिया जाता है सो वह सुख जाता है । अब धीरे धीरे पूरा जंगल अंदर से खोखला हो रहा है ।

अमरकंटक फॉरेस्ट रेंजर व्ही के श्रीवास्तव ने बताया कि वृक्षों को नष्ट करने वालो पर कड़ी कार्यवाही होती है । वृक्ष काटना या सूखाना कानूनन अपराध है ।

शासन प्रशासन अभी भी समय रहते अगर इस ओर इन जंगलों को बचाने में ध्यान दे दे तो जरूर अमरकंटक का यह हरित प्रदेश मैदान होने से बच सकता है । इसके चलते भी अब क्षेत्र की जलवायु का संतुलन बिगड़ रहा है । पहले यहाँ की वर्षा ऋतु हरियाली से भरपूर और ठंडी हवा के लिए जानी जाती थी , लेकिन अब गर्मी का अहसास हर वर्ष अधिक महसूस होता जा रहा है । यदि शासन प्रशासन और जनता समय रहते सतर्क नहीं हुई तो आने वाले वर्षों में अमरकंटक की प्राकृतिक सुंदरता और पर्यावरणीय स्वास्थ्य खतरे में पड़ जाएगा ।

नर्मदा नदी के पावन तट पर सबको जागकर नर्मदा जी के संरक्षण हेतु सामूहिक प्रयास करने की आवश्यकता है ताकि अमरकंटक का यह अमूल्य जंगल बचाया जा सके ।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *