अमरकंटक में गंगा सप्तमी पर उमड़ा आस्था का सैलाव , मां नर्मदा में लगाई पुण्य की डुबकी

मुंडन , कंछेदन संस्कार के साथ स्नान , पूजन अर्चन दान पुण्य , भक्तों ने मां नर्मदा से की सुख-शांति की कामना

संवाददाता – श्रवण कुमार उपाध्याय

अमरकंटक – मां नर्मदा जी की उद्गम स्थली/पवित्र नगरी अमरकंटक मध्यप्रदेश की प्रमुख धार्मिक , आध्यात्मिक एवं पुण्यसलिला मां नर्मदा में श्रद्धालुओं ने वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की पावन गंगा सप्तमी पर श्रद्धा , भक्ति और आस्था का अनुपम संगम देखने को मिला । पुण्य सलिला मां नर्मदा के उद्गम स्थल पर हजारों भक्त , श्रद्धालुओं ने प्रातःकाल से ही मां नर्मदा नदी , कपिला नर्मदा संगम में पहुंचकर पवित्र स्नान , पूजन-अर्चन एवं दान-पुण्य कर आध्यात्मिक पुण्य लाभ अर्जित किये ।

वैशाख शुक्ल पक्ष की सप्तमी , पुनर्वसु नक्षत्र , चित्रगुप्त प्रगटोत्सव गुरुवार 23 अप्रैल 2026 को गंगा सप्तमी के शुभ अवसर पर कोटितीर्थ घाट , रामघाट , पुष्कर बांध , कपिलसंगम तथा आरंडी संगम तट पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ रही । श्रद्धालुओं ने मां नर्मदा के पावन जल में आस्था की डुबकी लगाकर जीवन की समस्त बाधाओं के निवारण , सुख-समृद्धि , शांति एवं सर्वमंगल की कामना की ।

मां नर्मदा उद्गम मंदिर में नर्मदा दर्शन हेतु भक्तजन लंबी कतारों में शांतिपूर्वक खड़े होकर अपनी बारी का इंतजार करते नजर आए । मंदिर में विधिवत पूजा-अर्चना के पश्चात श्रद्धालुओं ने मंदिर प्रांगण के सभी मंदिरों का दर्शन और समक्ष विराजमान भिक्षुओं को यथाशक्ति दान देकर पुण्य अर्जित किया । गंगा सप्तमी के इस पुण्य पर्व पर परिवारजन मुंडन , कंछेदन संस्कार का भी विशेष महत्व रहा जिसके चलते अनेक माता-पिता एवं पालकों ने अपने अपने बच्चों का मुंडन , कनछेदन संस्कार संपन्न कराया ।

गंगा सप्तमी के पावन अवसर पर अमरकंटक निवासी कैलाश/प्रीति उपाध्याय की पुत्री कुमारी अन्वी उपाध्याय का मां नर्मदा मंदिर में पूजन अर्चन बाद ढोल नगाड़ों के मधुर ध्वनि के मध्य बच्ची का कनछेदन संस्कार कार्यक्रम सम्पन्न किया गया जिसमें परिवारजन के अलावा पड़ोसियों और नगर के प्रबुद्धजनों की भारी संख्या उपस्थित रही ।

अमरकंटक में प्रातः लगभग 5 बजे से ही नर्मदा स्नान का क्रम प्रारंभ हो गया था जो दिनभर चलता रहा । तीव्र धूप के बावजूद भी श्रद्धालुओं के उत्साह और भक्ति में कहीं कोई कमी दृष्टिगोचर नहीं हुई । वृद्ध महिलाएं एवं उत्साही श्रद्धालु जन पारंपरिक भजन-कीर्तन , मंजीरा एवं वाद्य यंत्रों के साथ नृत्य-गान करते हुए पूरे वातावरण को भक्तिमय बना रहे थे ।
अमरकंटक , अनूपपुर , शहडोल , डिंडोरी , गौरेला-पेंड्रा-मरवाही तथा बिलासपुर सहित आसपास के जिलों से बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं का आगमन हुआ । रामघाट पार्किंग स्थल पर वाहनों की अत्यधिक भीड़ देखी गई । हालांकि भारी भीड़भाड़ के बीच पेयजल की व्यवस्था का अभाव भी स्पष्ट रूप से महसूस किया गया जिससे तीर्थयात्रियों एवं पर्यटकों को पेयजल हेतु इधर-उधर भटकना पड़ा ।
गंगा सप्तमी के इस पावन पर्व ने एक बार पुनः सिद्ध कर दिया कि अमरकंटक केवल एक तीर्थ नहीं बल्कि आस्था , साधना और सनातन संस्कृति का जीवंत केंद्र है जहां मां नर्मदा की कृपा से हर हृदय भक्ति से अभिभूत हो उठता है ।

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