महिलाएं करवाचौथ व्रत रख कर की पूजन , सोहाग की रक्षा हेतु मांगी लंबी उम्र की कामना ।।

अमरकंटक :- श्रवण उपाध्याय (पत्रकार)
कार्तिक कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को महिलाएं करवाचौथ का व्रत रख की पूजा आराधना । इस व्रत को सुहागिन स्त्रियाँ अपने सोहाग की रक्षा के लिए एवं पति की लम्बी उम्र के लिए निरजला -व्रत रखती है । इस व्रत में दिन भर उपवास रखकर शायं कालीन पूजन करने के बाद रात्रि में चांद के निकल आने के बाद उनको अर्घ्य दिया जाता है । उसके बाद अपने पति देव् को चंदन लगाकर आरती करने के बाद चलनी से उनके सुंदर छवि को देखती है ।

व्रत में दो मिट्टी के करवे रखे जाते है व उन करवे में चार चार सींक लगाई जाती है । करवे के भीतर जल व अक्षत और हो सके तो पंचरत्न भी डाले उसके ऊपर प्याले में चावल व दिया रखा जाता है जो कि पूजन के समय जलता रहता है ।
इसमें गौरी जी की पूजा की जाती है साथ ही ‘ ॐ नमः शिवाय ‘ से शिव जी , कार्तिक जी , गणेश जी की भी पूजन की जाती है ।
इस प्रकार पूजन के समय स्त्रियां पूरा सोलह श्रृंगार करके विधि पूर्वक पूजन करती है । व्रत के समय जल , अक्षत , ऐपन , धूप , अगरबत्ती , पुष्पमाला , घी , रुई , सिंदूर की आवश्यकता होती है साथ मे गौरा भी रखी जाती है जिसके सिंदूर का सोहाग लिया जाता है ।
पंडित रामनरेश शास्त्री जी ने बताया कि पहले आचमन करके संकल्प करें कि मैं अपने सौभाग्य हेतु करवाचौथ (करक चतुर्थी) का व्रत करूंगी का संकल्प करके एक वट – वृक्ष बनाकर उसके जड़ में शिव-पार्वती , गणेश , व कार्तिकेय का चित्र बनाये व छपा हुआ भी रखकर सामने बिधि विधान से पूजन करे ।
सभी महिलाओं ने करवाचौथ का व्रत रखा और व्रत का पारण चाँद को अर्घ्य देने के बाद करती है । सभी को प्रसाद वितरण भी करती है ।

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