अमरकंटक :- श्रवण उपाध्याय
पवित्र नगरी अमरकंटक के उद्गम स्थल पर माँ नर्मदा जी की जल धारा के तट पर पावन पर्व छठ पूजा पर लोगो ने भारी संख्या में परिवार के साथ श्रद्धा पूर्वक षष्टि (छठ) माता जी की आराधना की ।

कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को डूबते सूर्य को अर्घ्य देकर उत्सव मनाया जाता है । छठ की शुरुआत चतुर्थी से ही नहाय खाय का परंपरा के साथ हो जाती है और फिर खरना , उषा अर्घ्य और सांध्य अर्घ्य के साथ यह त्योहार अब पूरे देश मे धूम धाम से मनता है । यह व्रत भगवान सूर्य की आराधना पूरी लगन और निष्ठा के साथ की जाती है और छठी मैया का यह पर्व श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया जाता है । पंडित गिरिजा शंकर पांडेय बताते है कि इस व्रत को करने से सभी मनोकामना पूर्ण होती है और संतान सुखी रहती है व दीर्घायु की प्राप्ति होती है । पौराणिक मान्यता है कि भगवान ब्रम्हा की मानस पुत्री और सूर्यदेव की बहन है छठी मैया ।
आज के दिन महिलाएं निर्जला व्रत रह कर सूर्य अस्त होने के पहले सज धज कर सभी प्रकार की पूजा सामग्री टोकरी , सूपा में भर कर सिर में रख कर घर के पुरषो द्वारा नर्मदा नदी के तीर्थ कोटि घाट में षष्टि माता के मानस रूप मान कर पूजन अर्चन करती है व सूर्य को अर्घ्य देकर घाट पर सभी साथ मिलकर भजन कीर्तन व छठी माता का उपासना करती है । सप्तमी के दिन सुबह सूर्योदय के पूर्व घाट पर पहुच कर स्नान कर पानी मे खड़े होकर उगते सूरज को अर्घ्यं प्रदान करते है उसके बाद पूजन कर सभी को प्रसाद बाटते है और अपना व्रत पूर्ण करती है और छठी माता से अपनी मनोकामना का आशीर्वाद मांगती है । अमरकंटक नगर के
गिरिजा शंकर पांडेय , श्रीमति कल्पना पांडेय , अशोक साहू , हरे राम गुप्ता , भरत गुप्ता , मुराली गुप्ता , श्रीमति रीना दास , छट्ठू गुप्ता व अन्य परिवार के साथ छठ पूजा में सम्मलित होकर डूबते सूर्य भगवान को अर्घ्य अर्पित कर पूजन किये ।
