अमरकंटक/नोनार पांडेय/कठघरा :- श्रवण उपाध्याय
माँ नर्मदा नदी के पावन तट पर सुबह सूर्योदय के पूर्व सपरिवार पूजन सामग्री लेकर नदी के किनारे ( घाट पर ) एकत्रित होकर पवित्रता के साथ छठी माता का पूजन उपरांत उगते सूरज को अर्घ्य देकर छोटी छठ व बड़ी छठ पूजा पूर्ण होता है । अमरकंटक के उद्गम स्थल पर माँ नर्मदा जी की जल धारा के तट पर पावन पर्व छठ पूजा पर लोगो ने भारी संख्या में परिवार के साथ श्रद्धा पूर्वक षष्टि (छठ) माता जी की आराधना की ।

कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को डूबते सूर्य को अर्घ्य देकर उत्सव मनाया गया । अगले दिवस सप्तमी तिथि को सुबह उगते सूर्य को अर्घ्य देकर छठ मैया की उपासना पूर्ण हो जाती है । इन्ही दो तिथियों को छोटी व बड़ी छठ पूजा भी कहते है । ग्राम नोनार पांडेय ( देवरिया ) के भास्कर पांडेय ने बताया कि इस क्षेत्र में भारी संख्या में लोग नदी व पोखर के समीप जाकर छठी माता जी का पूजन करते है । जब किसी की मान्यता पूर्ण होती है तो वो कोशी भरते है यानी छठी माता जी की विशेष पूजन करते है । चतुर्थी से ही नहाय खाय का परंपरा के साथ छठी त्योहार प्रारम्भ कर दिया जाता है और फिर खरना , उषा अर्घ्य और सांध्य अर्घ्य के साथ यह त्योहार अब पूरे देश मे धूम धाम से मनता है । यह व्रत भगवान सूर्य की आराधना पूरी लगन और निष्ठा के साथ की जाती है और छठी मैया का यह पर्व श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया जाता है । पंडित उमा शंकर बताते है कि इस व्रत को करने से सभी की मनोकामना पूर्ण होती है और संतान की प्राप्ति होती है , परिवार सुखी रहता है व दीर्घायु प्राप्त करता है । पौराणिक मान्यता है कि भगवान ब्रम्हा की मानस पुत्री और सूर्यदेव की बहन है छठी मैया ।

आज के दिन महिलाएं निर्जला व्रत रह कर सूर्य अस्त होने के पहले सज धज कर सभी प्रकार की पूजा सामग्री के साथ फल , मेवा मिष्ठान , गन्ना , साड़ी आदि के साथ टोकरी , सूपा में भर कर सिर में रख कर घर के पुरषो द्वारा नदी व पोखर के तट पर जाकर निश्चित स्थल पर हर वर्ष छठी माता का निर्जला व्रत रहकर पूजा अर्चना करते है । षष्टि माता के मानस रूप मान कर पूजन अर्चन करती है व सूर्य को अर्घ्य देकर घाट पर सभी साथ मिलकर भजन कीर्तन व छठी माता का उपासना करती है । सप्तमी के दिन सुबह सूर्योदय के पूर्व घाट पर पहुच कर स्नान कर पानी मे खड़े होकर उगते सूरज को अर्घ्यं प्रदान करते है उसके बाद पूजन कर सभी को प्रसाद बाटते है और अपना व्रत पूर्ण करती है और छठी माता से अपनी मनोकामना का आशीर्वाद मांगती है । इस पर्व को मध्य प्रदेश के अनेक क्षेत्र के अलावा उत्तर प्रदेश , बिहार के साथ ही उत्तर भारतीय लोग जंहा भी निवास करते है उन सभी जगहों पर परिवार के साथ छठ पूजा में सम्मलित होकर पहले दिवस डूबते सूर्य भगवान को अर्घ्य अर्पित कर पूजन करते है तथा अगले दिवस प्रातःकाल सूर्योदय पूर्व पूजन कर उगते सूरज को अर्घ्य देकर छठी माता का आशीर्वाद प्राप्त करते है । यह पर्व को मनाते हुए उस स्थान पर लाइट डेकोरेशन के साथ गाजे बाजे की भी कई जगह ब्यवस्था बनाये रखते है ।
